भारतीय क्रिकेट में यह विवाद और बदलाव का दौर है| और समझ में नहीं आ रहा कि इसमें क्रिकेट कहां है |

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी 14 जुलाई 2017 की सुनवाई में जिस तरह से भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अधिकारियों को लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू करने के रास्ते में रुकावट बनने में आड़े हाथों लिया -उसे देखते हुए ऐसा लग रहा है कि वह दिन दूर नहीं जब संभव है कोर्ट खुद ही बोर्ड पर लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू  कर दे- और किसी सहमति और सहयोग की जरूरत ही नहीं रहे |

बोर्ड के भूतपूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर के माफीनामे को कोर्ट ने इसी सुनवाई में मंजूर कर लिया और उनके विरुद्ध पर जूरी की कार्रवाई ने करने का फैसला किया | वह  बहरहाल इस सच्चाई को कैसे नजरअंदाज करें  कि अनुराग ठाकुर ने मीडिया में यह जरूर कहा कि उनकी आईसीसी को लिखी चिट्ठी के जिस अंश पर कोर्ट सबसे ज्यादा नाराज है  वह लिखने की ने सिर्फ सलाह आईसीसी के चेयरमैन शशांक मनोहर ने दी थी वह लाइनें उन्होंने खुद लिखवाई थी |

इसमें आईसीसी से अनुरोध किया गया था कि वह ऐसी कोई चिट्ठी दे दें जिसमें यह कह दिया जाए कि कोर्ट जो कर रहा है वह सरकारी दखल अंदाजी है |और इस वजह है से भारतीय क्रिकेट बोर्ड की ICC सदस्यता भी खतरे में पड़ जाएगी |

शशांक मनोहर ने उनकी इस बात का खंडन नहीं किया है | क्या है इस मामले की सच्चाई ?

इस बीच कोच के विवाद को कैसे नजरअंदाज कर दें  बोर्ड और  उससे साथ जुड़े लोग कोच के मामले को एक ऐसा तमाशा बना रहे हैं जिसमें बोर्ड की प्रतिष्ठा नहीं बढ़ रही | जिस तरह से सीओए ने रवि शास्त्री को नया कोच बनाते हुए जहीर खान और राहुल द्रविड़ को उनके साथ विशेषज्ञ के तौर पर छोड़ा वह अपने आप में एक विवाद बन गया है |

यह बिना किसी आधार का फैसला था इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बार-बार इस फैसले में बोर्ड ने अपनी घोषणा में संशोधन किया | पहले जहीर खान को गेंदबाजी का कोच और राहुल द्रविड़ को विदेश में टेस्ट  के लिए बल्लेबाजी का सलाहकार बनाया गया था | लेकिन उसके बाद जहीर को भी विदेश में टेस्ट के लिए ही गेंदबाजी का सलाहकार बना दिया गया | इतना ही नहीं यह विवाद भी उठा कि जहीर खान को सिर्फ डेढ़ सौ दिन का कॉन्ट्रैक्ट देंगे- अब तो सीओए ने भी इन नियुक्ति पर सवाल उठा दिया है और इस अंक के पब्लिश होने के समय तक सौरव गांगुली की कमेटी द्वारा यह कहे जाने के बावजूद कि इन दोनों की नियुक्ति रवि शास्त्री की सलाह से की गई है | हाल फिलहाल इस नियुक्ति पर आखिरी फैसला एक कमेटी के हवाले कर दिया गया है |

क्यों हुआ यह तमाशा  ?

एक कोच की नियुक्ति के लिए भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने बता दिया कि वह किस तरह से काम करते हैं |इस बीच क्रिकेट की बात करें तो सबसे पहले तो  मिताली राज और उनकी क्रिकेटरों को  विश्व कप के फाइनल में पहुंचने और अच्छे प्रदर्शन के लिए बधाई भले ही  मिताली की टीम विश्वकप ना जीत पाई हो लेकिन उन्होंने भारतीय  दर्शकों का दिल जरूर जीत लिया |

पिछले दिनों विराट कोहली की टीम वेस्टइंडीज में कमजोर मुकाबले के बावजूद वह प्रभाव नहीं दिखा पाई जो उनको दिखाना चाहिए था | सच तो यह है भारत के चयनकर्ताओं ने विश्व को ध्यान में रखते हुए खिलाड़ियों को आजमाने का एक बहुत अच्छा मौका गवा दिया है |



                                                                       एम.  एस . डी

भारतीय क्रिकेट में यह विवाद और बदलाव का दौर है| और समझ में नहीं आ रहा कि इसमें क्रिकेट कहां है |

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी 14 जुलाई 2017 की सुनवाई में जिस तरह से भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अधिकारियों को लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू करने के रास्ते में रुकावट बनने में आड़े हाथों लिया -उसे देखते हुए ऐसा लग रहा है कि वह दिन दूर नहीं जब संभव है कोर्ट खुद ही बोर्ड पर लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों को लागू  कर दे- और किसी सहमति और सहयोग की जरूरत ही नहीं रहे |

बोर्ड के भूतपूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर के माफीनामे को कोर्ट ने इसी सुनवाई में मंजूर कर लिया और उनके विरुद्ध पर जूरी की कार्रवाई ने करने का फैसला किया | वह  बहरहाल इस सच्चाई को कैसे नजरअंदाज करें  कि अनुराग ठाकुर ने मीडिया में यह जरूर कहा कि उनकी आईसीसी को लिखी चिट्ठी के जिस अंश पर कोर्ट सबसे ज्यादा नाराज है  वह लिखने की ने सिर्फ सलाह आईसीसी के चेयरमैन शशांक मनोहर ने दी थी वह लाइनें उन्होंने खुद लिखवाई थी |

इसमें आईसीसी से अनुरोध किया गया था कि वह ऐसी कोई चिट्ठी दे दें जिसमें यह कह दिया जाए कि कोर्ट जो कर रहा है वह सरकारी दखल अंदाजी है |और इस वजह है से भारतीय क्रिकेट बोर्ड की ICC सदस्यता भी खतरे में पड़ जाएगी |

शशांक मनोहर ने उनकी इस बात का खंडन नहीं किया है | क्या है इस मामले की सच्चाई ?

इस बीच कोच के विवाद को कैसे नजरअंदाज कर दें  बोर्ड और  उससे साथ जुड़े लोग कोच के मामले को एक ऐसा तमाशा बना रहे हैं जिसमें बोर्ड की प्रतिष्ठा नहीं बढ़ रही | जिस तरह से सीओए ने रवि शास्त्री को नया कोच बनाते हुए जहीर खान और राहुल द्रविड़ को उनके साथ विशेषज्ञ के तौर पर छोड़ा वह अपने आप में एक विवाद बन गया है |

यह बिना किसी आधार का फैसला था इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बार-बार इस फैसले में बोर्ड ने अपनी घोषणा में संशोधन किया | पहले जहीर खान को गेंदबाजी का कोच और राहुल द्रविड़ को विदेश में टेस्ट  के लिए बल्लेबाजी का सलाहकार बनाया गया था | लेकिन उसके बाद जहीर को भी विदेश में टेस्ट के लिए ही गेंदबाजी का सलाहकार बना दिया गया | इतना ही नहीं यह विवाद भी उठा कि जहीर खान को सिर्फ डेढ़ सौ दिन का कॉन्ट्रैक्ट देंगे- अब तो सीओए ने भी इन नियुक्ति पर सवाल उठा दिया है और इस अंक के पब्लिश होने के समय तक सौरव गांगुली की कमेटी द्वारा यह कहे जाने के बावजूद कि इन दोनों की नियुक्ति रवि शास्त्री की सलाह से की गई है | हाल फिलहाल इस नियुक्ति पर आखिरी फैसला एक कमेटी के हवाले कर दिया गया है |

क्यों हुआ यह तमाशा  ?

एक कोच की नियुक्ति के लिए भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने बता दिया कि वह किस तरह से काम करते हैं |इस बीच क्रिकेट की बात करें तो सबसे पहले तो  मिताली राज और उनकी क्रिकेटरों को  विश्व कप के फाइनल में पहुंचने और अच्छे प्रदर्शन के लिए बधाई भले ही  मिताली की टीम विश्वकप ना जीत पाई हो लेकिन उन्होंने भारतीय  दर्शकों का दिल जरूर जीत लिया |

पिछले दिनों विराट कोहली की टीम वेस्टइंडीज में कमजोर मुकाबले के बावजूद वह प्रभाव नहीं दिखा पाई जो उनको दिखाना चाहिए था | सच तो यह है भारत के चयनकर्ताओं ने विश्व को ध्यान में रखते हुए खिलाड़ियों को आजमाने का एक बहुत अच्छा मौका गवा दिया  है |




                                                                       एम.  एस . डी